Hunter Shark Force... एक खोया हुआ नगीना
आर्ट subjective होती है। किसी को किसी खास तरह की आर्ट पसंद आती है, तो किसी को किसी खास आर्टिस्ट की। अब अगर अपने भारतीय कॉमिक्स को ही ले लें, विशेषकर राज कॉमिक्स तो कुछ लोग अनुपम सिन्हा जी की भारी-भरकम एवं एक ही पैनल अधिक से अधिक कंटेंट डालने की आर्ट के फैन है, वहीं कुछ को बेदी जी का बांकेलाल का सरल लेकिन एक एक चित्र से हास्य प्रस्फुटित करने वाला चित्रांकन पसंद आता है। कुछ लोगों को प्रदीप साठे जी की अंगारा कॉमिक्स की आर्ट, जो कि बेहद ही सरल होती थी, वह पसंद आती है तो वही कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें मनु जी की शानदार आर्ट से नीचे कुछ भी मंजूर नहीं। असल में देखा जाए तो आर्ट कहानी को complement करती है और किसी भी कॉमिक्स में आर्ट वही अच्छी होती है जो कहानी को और निखार कर सामने लाए या फिर कहा जाए की उस कहानी की theme से तालमेल खाती हो। ऐसा तभी संभव होता है जब चित्रकार और कहानीकार एक दूसरे के भाव को समझें या फिर तब जब कहानी लिखने वाला और चित्र बनाने वाला एक ही व्यक्ति हो। कुछ इसी प्रकार की कॉमिक्स है जिसका आज हम करने जा रहे हैं dissection। इस कॉमिक्स की कहानी लिखने वाले और चित्र बनाने वाले व्...