आदिपर्व...स्वर्णिम युग में वापसी का द्वार
कहानियों का संसार बेहद विचित्र लेकिन अंत हीन होता है खास करके जब बात हो रही हो कॉमिक्स की। कॉमिक्स की दुनिया में कब क्या हो जाए या कहा नहीं जा सकता और जो हो रहा है उसको झुठलाया भी नहीं जा सकता। कहानियों की एक कमी भी होती है अगर किसी कहानी को बहुत लंबा खींचा जाए तो धीरे-धीरे करके उसमें नीरसता का संचार होने लगता है। कुछ ऐसा ही राज कॉमिक्स के मुख्य किरदार नागराज की कहानियों में होने लगा था। खजाने की खोज के बाद शुरू हुआ विश्व रक्षक नागराज का सफर धीरे धीरे एक दायरे में बंधना शुरू हो गया था। अब अगर यह कोई सच्ची कहानी होती है तो इसमें बदलाव करना असंभव होता लेकिन यह कल्पनाओं का संसार है, यहां पर मात्र कल्पनाओं को पंख देने की जरूरत है और वह अनंत आकाश में किस दिशा में उड़ान भर लेंगे यह कई बार लेखक भी नहीं सोच पाता है। इसी प्रकार विश्व रक्षक नागराज की कहानियों में उत्पन्न हो रही नीरसता को भंग करने के लिए पहले आतंक हरता और उसके पश्चात एक नए आयाम के नरक नाशक नागराज की रचना, हमारे देसी stan lee श्री संजय गुप्ता जी की कल्पना शक्ति से हुई। बदलाव के साथ भी एक समस्या होती है की वह अधिकतर लोगों को पसंद न...